#dabba vala@ Greata thunberg#sanjay sir

1

 आज  हम आप लोगो को कुछ ऐसे व्यक्तिओ  के बारे में जानकारी देना चाहने जिन्होंने देश को बदलने में कसर  नहीं छोड़ी तो दूसरा व्यक्ति जो यह दर्शाता है की मैनेजमेंट बहुत आवश्यक है। 

डब्बावाला मुम्बई -



डब्बावाला या डब्बेवाले ऐसे लोगोंॱ का एक समूह है जो भारत मेंॱ ज्यादातर मुंबई शहर मेॱ काम कर रहे सरकारी और गैर-सरकारी कर्मचारियों को दोपहर का खाना कार्यस्थल पर पहुँचाने का काम करता है.

मुंबई डब्बावाला से जुड़ी कुछ  जानकारी-

  • 1890 में मुंबई डब्बावाला की शुरुआत की गयी थी। 2 लाख लोगों को खाने की सप्लाईतीन घंटे के अंदर खाना घर से लेकर दफ्तर तक पहुंचता है ,हर रोज 60 से 70 किलोमीटर तक का सफर तय करते थे. खाने की सप्लाई के लिए 600 रुपये महीना खर्च खाने की सप्लाई में साइकिल और मुंबई की लोकल ट्रेन की मदत होती है काम में जुड़े प्रत्येक कर्मचारी को 9 से 10 हजार रुपये मासिक मिलता हैसाल में एक महीने का अतिरिक्त वेतन बोनस की तोर पर लेते है.नियम तोड़ने पर एक हजार फाइन लगता है. डबेवाले संघटन के जनरल सेक्रेटरी स्व.गंगाराम तलेकर के कार्यकाल मे डबेवाला संघटन को अनेक पुरस्कार मिले. जिसमे सिक्स सिग्मा, आय,एस,ओ,प्रमाणपत्र है.

    मुंबई के डब्बावाले एक बिज़नसमैन को क्या सीख देते हैं?  बहुत सारे ऐसे बिज़नस है जो नए उद्यमी के लिए आदर्श होते हैं. नयें उद्यमी को इन आदर्श व्यवसायों से बहुत कुछ सीखने को मिलता हैं. डब्बावाले एक ऐसा बिज़नस मॉडल हैं जिससे नये उद्यमी को बहुत कुछ सीखने को मिलता हैं

  • दृढ निश्चय करना
  • समय का महत्व 
  • परिश्रम
  • तकनीकी
  • त्याग (समर्पण)      जैसे-जैसे शहर बढ़ता गया, डब्बा डिलवरी की मांग भी बढ़ती गई. उसी समय (शुरूआत में) बनाई गई कोडिंग प्रणाली अभी भी 21वीं सदी में भी कार्य कर रहा हैं. सफ़ेद पोशाक और पारम्परिक गांधी टोपी पहने मुंबई शहर में ये डब्बे वाले लोगो के घर से खाना उनके ऑफिस पहुंचाते हैं.आप लोगो को यह जानकर बड़ा आश्चर्य होगा  कि मुंबई डब्बावाले बहुत कम पढ़े लिखे हैं फिर भी काम इस प्रकार करते हैं कि अपने आप में एक मिशाल है. नये उद्यमी और जो लोग व्यवसाय कर रहे हैं उन्हें इनसे सीख लेनी चाहिए. 

    ग्रेटा थनबर्ग-

  •  16 साल की ग्रेटा लड़ रही है धरती बचाने की लड़ाई, आप को कुछ रोचक जानकारी देंगे उनके बारे में -

  •  जिस उम्र में बच्चे अपना शौक पूरा करने के लिए अपने माता-पिता से जिद करते हैं, उस उम्र में एक लड़की पूरी दुनिया में क्लाइमेंट चेंज के खिलाफ मुहिम की झंडाबरदार बन गई है. दुनियाभर में मौसम में हो रहे परिवर्तन (क्लाइमेट चेंज) को लेकर अलख जगाने वाली 16 साल की यह लड़की स्कूल छोड़कर यह काम कर रही है. वह धरती बचाने की लड़ाई लड़ रही है. स्वीडन की रहने वाली इस लड़की का नाम ग्रेटा थनबर्ग  है. वह जलवायु परिवर्तन को लेकर दुनियाभर में जागरूकता फैला रही है. 
  • वो शुक्रवार को  स्कूल नहीं जाती थी  ग्रेटा-
  • उनका स्कूल स्ट्राइक फॉर क्लाइमेट या फ्यूचर फॉर फ्राइडे कैंपेन पूरी दुनिया में मशहूर है. ग्रेटा हर शुक्रवार को स्वीडेन की राजधानी स्टॉकहोम में संसद के बाहर बैनर लेकर प्रदर्शन करतीं हैं.नवंबर 2018 के स्कूल स्ट्राइक फॉर क्लाइमेट के उनके कैंपेन में 24 देशों के करीब 17 हजार छात्रों ने हिस्सा लिया. इसके बाद वह जलवायु परिवर्तन को लेकर बड़ी-बड़ी कांफ्रेस और आयोजनों में हिस्सा लेने लगीं. इसी साल अगस्त तक उनके कैंपेन में हिस्सा लेने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 36 लाख हो गई. 
  • उन्होंने अपनी पढ़ाई से एक साल का अवकाश लिया है- उन्होंने कहा, '' आप युवा हमारे पास यहां उम्मीद के साथ आए हैं.'' उन्होंने नेताओं से कहा, ''आपने अपनी खोखली बातों से मेरे सपने और बचपन छीन लिये, फिर भी मैं खुशकिस्मत लोगों में शामिल हूं. लोग त्रस्त हैं, लोग मर रहे हैं, पूरी पारिस्थितिकी ध्वस्त हो रही है.'' उन्होंने कहा, ''हम सामूहिक विलुप्ति की कगार पर हैं और आप पैसों के बारे में तथा आर्थिक विकास की काल्पनिक कथाओं के बारे में बातें कर रहे हैं. आपने साहस कैसे किया?''
Tags

एक टिप्पणी भेजें

1टिप्पणियाँ
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.
एक टिप्पणी भेजें

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !